कविता – क्या होता है ये फूलडोल महोत्सव

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बड़ी ही सुन्दर कविता के माध्यम से दर्शाया गया है की क्या होता है ये फूलडोल महोत्सव।

होता है अलौकिक ये पाँच दिनोका फूलडोल महोत्सव। जहाँ साक्षात् श्री रामचरणजी महाराज का है वास्तव। सुबह के रामधुनी से शुरुआत करके मन को प्रसन्न करनेका आनंदी उत्सव। ऐसा है ये फूलडोल महोत्सव….। जहाँ साक्षात् गुदड़ीजी महाराज के दर्शन करनेका पावन अवसर। जिसके दर्शन होते ही ज़िन्दगी जाए सवर। ऐसा है फूलडोल रामनाम रूपी भँवर……..। जहाँ मिलता है आचार्य श्रीके अद्भूत प्रवचन सुननेका मौका। जिसे सुनते ही दिमाग में ज्ञान का लगता है चौका। यह पावन पर्व है अनोखा। जो भी इनकी शरण में आये उनकी भवसागर से पार होती है नौका। ऐसा है फूलडोल नाम राम जपने का मौका…….| जहाँ होता है श्रीवाणीजी का पाठ। जो भी इसे पढ़ता है उसे बारादरी में बैठने को प्राप्त होता है ठाट। ऐसा है फूलडोल का ठाट….। जहाँ श्री गोटकाजी का निकलता है जूलुस। जिसके दर्शन करते ही अद्भूत आनंद होता है महसूस। उनके साथ ही थाल का होता है आगमन। जो देखते ही ख़ुशी से झूम उठता है मन। जो भी आये श्री महाराजजी की शरण। उसे हँसते हुए मिलता है मरण। जो है स्वयं दुखों के तारन हारण। जिन्होंने किया है अलौकिक रूप धारण। ऐसा है ये फूलडोल पावन…। जहाँ दूर दूर से भक्त आते है करकर पैदल यात्रा। जिसके अंतर की भी नहीं होती कोई मात्रा। ऐसा है ये फूलडोल जैसे हो नवरात्रा……..। जहाँ चढ़ाया जाता है संतों का चढ़ावा। जो भी दिल से थोडा भी चढ़ाये वो खाली हाथ कभी नहीं जाएगा यह है दावा। ऐसा होता है फूलडोल में संतोंको चढ़ावा……। जहाँ शाममें गायी जाती है आरती। जिसे गाते ही स्वयं रामजी की याद आती है मूर्ति। जिनकी अलौकिक है मूर्ति। ऐसी होती है फूलडोल में आरती……। जहाँ के रंग में है इतनी ताकत। जो भी इसे छूले उसकी सुधर जाये सेहत। ऐसा होता है फूलडोल महोत्सव………। जहाँ महाराजश्री का होता है आगमन। वहाँ बरसने लगते है सुमन। उन्हें देखते ही सब करते है नमन। ऐसा है फूलडोल में महाराजश्री काआगमन…….। आखिर में 2 ही पंक्तियाँ………। फूलडोल जिसका नाम है। आनंद की अनुभूति कराना जिसका काम है। ऐसे प्यारे पर्व को। मेरा बारम्बार प्रणाम है। राम जी राम राम

सोर्स: रामस्नेही संप्रदाय

पढ़िए – फूलडोल महोत्सव की शुरुआत भीलवाड़ा से

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